करवट ले तो टकराते थे,
घुटना कोहनी चुभ जाते थे,
सारी रात जम्हाइयाँ ली और जागे रहे,
तीनों थे हम, तीनों के लिये छोटा सा बिस्तर,
मैं और वो और चाँद भी था !
सब के लिये घर छोटा था,
मैं और वो और ख़्वाब थे कुछ,
ख़्वाब अक्सर बच्चों की तरह लड़ पड़ते थे
शोर बहोत हो जाता था,
उनको अकेला छोड़ के हम
अब अलग-अलग रहते है,
तीनों के लिये बिस्तर छोटा था,
मैं और वो और मूड हमारा
हम दोनों कोने में सिमट कर सो जाते थे,
मूड हमारा बीच में लेटा हांफता रहता था,
आख़िर काट के अलग कर लिये है
बिस्तर अलग-अलग कमरों में अब
अपने-अपने मूड को लेकर सो जाते हैं