इश्क़ मे कशिश ए चंद लम्हो की रहमत मिजाज है,
चाँद जमीं पर उतर आये ए सबनम सहजादी का उस्ताद है,
आसमाँ कहे देख गौर से मेरे से जुदा हुआ तालुक्क नीचे बैठा,
तबाही का शीला हर नज्म मे जीते जी मरने का गुरुर सा इतिजाम् हैं।
मुर्जाये हुवे गुलाब को महकाया, उसको हर सफ़र मे मुस्कुराया,
बे अदब ए दिल तोड़ने वाले ने मुझे बार बार कितनी बार तड़पाया?
कलम स्याही से भरी हुई ,आँखे समुंदर से भरी हुई, काग़जो की कमी हुई,
इतिहास बनकर काग़जो मे बैठे, अल्फाज ए लफ़्ज के कैसे किताबों को पढ़कर रुला बैठे ।
DEAR ZINDAGI 🙏