शाम
अभी घड़ी की सुइयाँ देगी संकेत,
और शाम हो जाएगी ।
ऑफिस वाले बनकर बच्चे दौड़ेगे,
पंक्षी लौटकर आएँगे अपने घर को,
हरापन छुपा लेगी प्रकृति भी,
समुद्र भी पा लेगा शीतलता को,
और शाम हो जाएगी ।
दोहपर को ढालते हुए,
नदी भी अपना रंग बदलेगी,
हर एक का बदन थका- सा लगेगा,
और शाम हो जाएगी ।
वो ऑफिस से निकलकर आयेगी मिलने,
साथ बैठकर पियेंगी चाय और कॉफी ,
बात होगी कुछ मिठी कुछ खट्टीसी,
और शाम हो जाएगी ।
खेल के मैदान खाली होंगे किशोरों से,
किशान हल जोतना छोड़ देगा,
जब चारो और लालिमा सा जायेगी
और शाम हो जाएगी ।
भरत (राज)