#vacation
आज मुझे मेरी अलमारी में सामान समेटते हुए एक लिफाफा मिला।
मुझे वो लिफाफा याद है अभी तक उस पर लिखा था अवकाश पत्र।
वो देखते ही मेरे होंठ कंपकंपाने लगें जैसे किसी नव यौवना में जब कोई प्रेमी प्रेमिका के होंठों को चूमने पर महसूस होता है।
ये अवकाश कैसा अवकाश था मेरे जीवन में जो इस वृद्धावस्था में भी मुझे किसी की याद दिला गया जैसे कि कोई प्रेम पत्र हो मेरे लिए या तो फिर उसने सजा ही सुनाईं थी मेरे लिए।
क्या था उसका प्यार या फिर इतनी कठोरता से मुक्त कर दिया हो उसने।
मुझे आज तक यह न समझ आया कि आखिर मुझे वो अवकाश पत्र दिया ही क्यूं उसने।
मेरी तो कोई ग़लती भी नहीं थी तो मुझे किस लिए वो आजीवन कारावास रूपी वो अवकाश पत्र मिला।
और आज तक मैं खुद को उस अवकाश से मुक्त नहीं कर पाईं हुं और ना कर पाऊंगी।