चाहे तू कितनी भी ना समझ बन जाए,,,,
उड़ना तो पड़ेगा तूझे,
कुछ पलों को भूलकर ,
तरक्की का चोला पहन ना पड़ेगा तूझे,
उड़ना तो पड़ेगा तूझे,
छोटे से कांटे को दूर कर,
दर्द को भले ही महेसूस कर,
पैर को उठा आगे ,चिल्लाना बंद कर,
चलना तो पड़ेगा तूझे,
शब्दो की पोटली खोल,
गले से निकाल बंदीसे ,
तकिया लगाए हुए बैठी है मुंह पर,
बोलना तो पड़ेगा तूझे,
मन की भांति मन को बोल,
मन को ना समझा तू,
रफ्तार किस्सों की ना दबा के रख,
सोचना तो पड़ेगा तूझे,
जंजीरे दुनिया की तोड़,
फेंक उसको ताला तोड़,
चाहे कितना भी बंधन रिश्तों का ,
दौड़ना तो पड़ेगा तूझे,
मौन रहकर काम कर,
चिल्लाके कहीं न बात कर,
समाज की ऐसी बातो को छोड़,
वहां से मुड़ना तो पड़ेगा तूझे,
बदनाम सा न काम कर,
नाम के लिए काम कर,
तरक्की की आग में झोंक दे खुदको,
आगे तो बढ़ना पड़ेगा तूझे,
तानों सी बाते छोड़,
किसीसे भी तू नाता तोड़,
अव्वल लाना है खुद को तो,
दूरियां लोगोसे बना नी पड़ेगी तूझे,
क्या कर लेगी ना रहेगा जीवन,
आत्मा उड़ेगी कमल फूल से,
मुआवजा नहीं भर पाओगे जान देने वाले का,
करके कुछ दिखाना तो पड़ेगा तूझे,
समझ नही आयेगी लीला ये संसार की,
खुद को सम्हाल ले,
रफ्तार है बहुत तेज लोगो की,
नंदी के वास्ते,
उड़ना तो पड़ेगा तूझे।
खूब कहा है नंदी ने,,,,,,,,,,
बैठे ना रहें बैठने वालों ,
उठों चलो और दौड़ो,
नाकामियों को कर दो खुद से दूर ,
पूछने वाले पूछेंगे तुमसे ना तुम्हारा हाल,
मन को मजबूत करो पंख को फैला दो और बस भरो उड़ान इस साल।
~नंदी❤️