गरीब का आत्मसम्मान
राजन अनाथ लड़का था लेकिन पढ़ने में होशियार था । वह कॉलेज के बाद छोटे -मोटे काम करके अपना गुज़ारा करता और कॉलेज की फीस देता। एक शाम वह एक शादी में सहायक का काम करने गया ।वह हर काम तन्मयता से कर रहा था ।अचानक एक आदमी ने शोर मचाना शुरू कर दिया कि उसके बैग से उसकी कीमती घड़ी ग़ायब हो गई ।सभी सहायकों की तलाशी शुरू हो गई ।जब राजन की बारी आई तो उसने कहा कि हर गरीब आदमी चोर नहीं होता लेकिन सेठ तलाशी लेने पर अड़ा रहा । राजन ने कहा ,"इस वक्त मैं मज़बूर हूँ लेकिन समय सबसे शक्तिशाली है ।मैं कानून का विद्यार्थी हूँ ।समय आने पर मैं आप पर मान -हानि का दावा करूँगा क्योंकि आपने आज एक ईमानदार आदमी के आत्मसम्मान को कुचल दिया है ।" उसके आत्मविश्वास से डरकर सेठ ने फिर किसी की भी तलाशी नहीं ली ।