ना जान पाया में ।
इश्क है तु मेरा या किसी और का,
तेरी नजदीकियों से क्यों धड़का दिल मेरा,
ना जान पाया में ।
वैसे तो नज़रे उठाकर चलता,
नज़रे तूने झुकाई तो झुकी मेरी क्यों?
ना जान पाया में ।
बहाने बनाये नही मिलने के कभी,
पर ना जाने तेरे बुलावे पर दोड क्यों आता हु
ना जान पाया में।
चेहरे तो बहुत थे इश्क के शहर मे,
मेरा दिल आकर टकराया क्यों तुझसे,
ना जान पाया में।
तुझे पाकर फिर खो दिया,
जज्बात मेरे जलाने आप आये क्यों?
ना जान पाया में।
भरत (राज)