आंख मेरी नम थी दिल भी भर आया था
जब पापा का खयाल मन में आया था
उंगली पकड़ कर चलना जिसने सिखाया था
मेरी हर ज़िद पर मुझे खिलौना दिलाया था
आज दूर चले गए वो मुझसे ये कैसा फसाना था
आखरी समय मैं उनके साथ था पर कुछ ना कह पाया था
उनकी आखरी सांस मेरे कंधे पर टूटी थी
और मैं चाह कर भी कुछ ना कर पाया था
आंख मेरी नम थी दिल भी भर आया था
जब पापा का खयाल मन में आया था