हमारे राम।
आज भी बचे है राम हर किसी के वचनो मे,
तेरे वचनो मे, मेरे वचनों मे, दशरथ के राम।
शिश झुका, शरण वंदन ,लेते आज्ञा पिता की,
देखो चले राम वन को, राम से श्री राम बनने।
माथे पर तिलक, हाथो मे धनुष साथ सीता के,
वचन खातिर वन चले,लेकर भ्राता लक्ष्मण साथ।
वचन तोड़ा लक्ष्मण ने, सीता हरी गई रावण से,
जंगल जंगल भटक रहे, देखो सीता के राम।
हनुमान संघ नल नील करते निर्माण 'रामसेतु' का,
राम सेना देखो पहुँची लंका, लेकर साथ हनुमान को।
करके वद रावण का, विभिशन को सोप राजगद्दी,
देखो बनकर श्री राम लौटे अयोध्या सीता के राम।
भरत माली (राज)