पतझड़ आता है और अपने साथ
अनगिनत जीवन ले जाता है
नग्न पेड़ों को देख लगता है
गयी रात एक तूफ़ान आया था
जो इन से इनका
सब कुछ चुरा ले गया
शेष रह गयी इनकी यह ठूँठ सी शाँखें
जो हैरान है, परेशान हैं, उन माओं की तरह
जिनके बच्चे उन से छीन लिए जाते हैं
और वह स्तब्ध सी खड़ी बस देखती
रह जाती है अपनी बर्बादी का मंज़र
कल तक जो हरा भरा था
आज वो निर्वस्त्र कहलाता है
कुछ ही क्षणों में मंज़र बदल जाता है
पतझड़ आता है और अपने साथ
अनगिनत जीवन ले जाता है
टूटे हुए पत्तों को देख
जहन में बस यही ख्याल आता है
के जरूर एक जीवन का दूसरे जीवन से
कोई नाता है
एक जीवन जाता है दूजे की आहट दे जाता है
के पेड़ नहीं मनाता कभी संताप
अपनों से बिछड़ने का
बस एक हवा का झोंका और सब खत्म
सिखा जाता है जीवन का क्रम
के जब तक काम का है आपका जीवन
तभी तक मान है सम्मान है परिवार में स्थान है
जो ना रहे आप कभी किसी काम के
तो निकाल दिए जाओगे एक दिन
परिवार नामक इस पेड़ से और हो जाओ गे
धराशाही इन्हीं पतझड़ में झड़ी पत्तियों की तरह
क्यूंकि पतझड़ आता है और अपने साथ
अनगिनत जीवन ले जाता है.....
पल्लवी