शौहरते, जमीन जयदाद इतना बढ़कर हो गया है कि इंसान कि जिंदगी का भी ख्याल नहीं..........!!
किस ओर जाने लगे है लोग......... इंसानियत मारते जा रहे है.........!!
सब कुछ तो यही धरा रह जायेगा राख के सिवा है भी क्या जानते हुये भी निहायती बेरहम होते जा रहे हैं लोग...............!!