जब तुम नज़रे मिलाने लगे,
हम धीरे धीरे संवरने लगे,
आप मे हम यू खोने लगे,
जज्बातो की वजह बनने लगे,
तुम रुक रुक कर मुड़ने लगे,
हल्के से मुस्कराने तुम लगे,
पायल तुम खन खनाने लगे,
दिलके अरमान गुनगुनाने लगे,
अरमानो को खिलखिलाने लगे,
रात भर अब तुम जगाने लगे,
अब रोज इंतजार करने लगे,
पल पल सताने लगे हो तुम,
ख्वाईशे पालने लगे है हम,
रेत पर घर हम बनाने लगे ,
धीरे से तुम्हारी गिरफ्त मे आने लगे,
अब मुस्कराने की वजह "
"तुम ही हो"
भरत (राज)