जानती हूँ,जीने का मकसद..
और यह भी पता है..
इक दिन,'पूरा आकाश होगा मेरी मुठ्ठी में'..
छिटपुट,खुशियाँ अब भी है;झोली में..
कभी खुशियों का सागर भी होगा...
सिर्फ मेरे ही हिस्से में...
मैं आज की बात क्यों करूंं..?
अक्सर कल रहा है मेरे हिस्से में🙂
( डॉ अनामिका)