विषय : चहेरा।
बात करते है इंसान के चहेरे की, हर चहेरा एक कहानी बयां करता है।
इंसान के मन की स्थिति बया कर जाता है उसका चहेरा, वो खुश है,दुखी है, या फिर अंदर से टूटा हुआ पड़ा है,कुछ तो अंदर से मर जाता है , जो इंसान का चहेरा बया कर जाता है।
जिंदगी में हर ऐशो आराम के बावजूद इंसान खुश नहीं होता है, एक फेक हसीं के साथ वो जीवन को जीता है। बहुत जरुरी होता है खुद को सुकून देना, जब तक इंसान का मन खुश नहीं है उसके चहेरे पे वो खुशी कभी दिखने नही वाली है।
हर इंसान के जीवन में एक मोड़ आता है, जहा पहले वो बहुत Childish हुआ करता होता था एक वक्त के बाद वो इंसान बहुत समझदार और शांत दिखने लगता है।
कुछ अंदर से तब मर जाता है , जब इंसान खुद से ज्यादा किसी से प्यार कर बैठ ने की भूल कर देता है, प्यार हो जाना तो कभी गलत है ही नही, लेकिन जिंदगी कभी हमारे हिसाब से तो नही चलती है।
तुम्हारा चहेरा सब बया कर देता है की तुम वास्तव में किस स्थिति में जी रहे हो। हर इंसान क्या एक वक्त आता है की एक बार उसे टुटके बिखरना होता है, पर जब वो खुद को समेट लेता है फिर वो अंदर से इतना मजबूत हो जाता है की वो जीना सीख लेता है, पर जब तक वो खुद के लिए जीना नही सिख पाता है तब तक उसके चहेरे की उदासी हर कोई पढ़ पाता है।
*मनका दर्पण होता है हमारा चहेरा, चाहे लाख छिपाने की कोशिश करे मन की स्थिति, पर हर चीज बया कर जाता है यह चहेरा*।