અજાણ્યો પત્ર - 02
मेरे ख्वाबों में तुम्हारा रोज का आना यू लग रहा है, जैसे मुरझाए हुए फूल पे कुछ भंवरे गीत गुनगुना रहे हो। जबकि में तो भीतर से हार चुका हूं। नहीं नहीं!! उसमे तुम खुद को दोषित मत ठहराना। मेरा मुरझा जाना, मेरा मौन रह जाना ये तो मेरी नियति है और तुम तो जानती हो नियति को कोई नही बदल सकता।