silent खामोशी जो कही इन शहर गांव और पहाड़ों के कोनो से गायब सा हो गया है न कोई पंछी की आवाज सुनता है न सुबह होने का एहसास बस एक पेंडुलम भरी जिंदगी बन सी गई है और दिन रात इसी के दीवाने हुए है और कितनी fix और काबू में करनी है अपनी जिंदगी कैसे इनमे कुछ और पेच fix किए जाए
बाहर के शोर ने इतना घर कर लिया है की अंदर के शोर ने मानो दम सा तोड़ दिया है बेकाबू सा सफर
न जाने कहा जाना है
न जाने क्या पाना है
सुकून के सिवा
वो कहते है न गालिब
की पा लेने से सब मिल जाता तो तमाना किसकी करोगे
मगर ये तो बताया ही नहीं गालिब में की कब tk aur कितना पाना रह गया था कब तक और कितनी तमन्ना bacchi h दिल को शांत करने में
बे आदाब सी बन के ही रह गई जिंदगी
बेकाबू सी मैं मेरे सपने
और ये बाहर का शोर
जो मेरे अंदर को मार रहा है दिन ब दिन
#खामोशी 🤐
@njali