ज़िंदगी??
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बुलबुले सी जिंदगी
कोई ख़बर नहीं
कभी जा कहाँ
खड़ी हो ज़िंदगी - -
साँस के द्वार पर
उम्र के पड़ाव पर
अर्चना की प्रीत सी
माटी की महक सी
हरेक पल में संग चलती
अचानक ही
कहाँ थमे है ज़िंदगी
नाराज़ न होना
उससे कभी
कुछ पलों की जिंदगी
तुझे बहुत प्यार
दुलार ज़िंदगी
कभी लगे प्यारी कभी
लगे ख़ारिज ज़िंदगी
आजा, घुल जाएँ तुझमें
मना लें त्योहार ज़िंदगी!!
तेरा शुक्रिया
बार बार ज़िंदगी!!
शुभ रात्रि मित्रो
आपकी मित्र
डॉ प्रणव भारती