यह रूह हमको नहीं मिली है
भले हमे ये बदन मिला है
वो रूह सबको नही मिली है
भले जिसे भी बदन मिला है
उसी को जीवन नही मिला है
जिसे तिरंगा कफन मिला है
वे दौड़ते थे सुबह सुबह जब
किसी ने पूछा कहा जाओगे
वतन से बाहर जाए कहा जब
ये खूबसूरत वतन मिला है
यह रूह हमको नहीं मिली है
भले हमे ये बदन मिला है
उसी को जीवन नही मिला है
जिसे तिरंगा कफन मिला है