Hindi Quote in Poem by Preeti

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ना तो प्रारंभ ना ही अंत,
किसी रिश्ते में प्रेम का आंकलन कर सकते हैं।
जिस मनःस्थिति से,
किसी संबंध को स्थापित किया जाता है,
ज़रूरी नहीं, वह सदैव वैसी ही बनी रहेगी।

समय की निरंतरता,
मन में उपजी भावनाओं की कोपल को ,
परिपक्वता की ओर ले जाने का कार्य करती हैं।
काल अपनी गति से आगे बढ़ते हुए ,
उन भावनाओं को
कई ऋतुओं के माध्यम से आगे ले जाता है।
ऋतुएं आकांक्षाओं की, अपेक्षाओं की,
चंचल मन के अधीर होने से धीर होने तक की।

प्रेम अपने में संपूर्ण है।
उसे प्रेमियों के संग रहने की अवस्था में ही पनपने
जैसी किसी शर्त से नहीं गुज़रना पड़ता है।
प्रेम मन की माटी में, शाश्वत स्पर्श से,
वियोग में बही अश्रु धाराओं द्वारा,
अकस्मात हुई भेंटों से,
कागज़ में शब्दों से लिपटे हुए
जज़्बातों के द्वारा भी पनप उठता है।

प्रेमी के सानिध्य में रह कर ,
निश्चित ही प्रेम अनंत रूप ले लेता है
किंतु प्रेमी के साथ न होने की स्थिति में
प्रेम मरता थोड़े है!
वह तो तब भी जीवंत रहता है हमारे अंदर ।

यह हमपर निर्भर करता है
कि
हम प्रेम को सिर्फ प्रेमी से जोड़कर
परिभाषित करते हैं या स्वयं से भी ।

Hindi Poem by Preeti : 111902093
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