संघर्ष का एक सुंदर सा आसमान था
सपना मेरा भरना उसमें उड़ान था
चल पड़ा मैं भी उस सफर पर
जो मुझे मेरी मंज़िल तक पहुंचाता था
कामयाब होने का मौका
मुझे जहां से मिल पाता था
जब मैं पहुंचा वहां तो देखा एक मैं ही नहीं
अनेकों परिंदे यहां हैं
ये एक आसमां नहीं बल्कि
दुनिया के सपनों का जहां है
सोचा कि पछाड़कर सभी को मैं आगे निकल जाऊंगा
सफलता का मेडल तो मैं ही लेकर आऊंगा
पर हमसे भी धुरंधर कई परिंदे वहां थे
एक पल को भी रुकने वाले वो कहां थे
पूरी रफ्तार से दौड़कर वो मुझसे आगे निकल गए
कुछ ही देर में आंखों से हो ओझल गए
अपनी पूरी रफ्तार से मैं भी उड़ा
लेकिन वहां पहुंच ना पाया
दिख तो रही थी मंज़िल लेकिन
उसे पा नहीं पाया
वो हुए कामयाब और हम नाकामयाब रह गए
दुनिया वाले भी असफलता के ताने दे गए
मेहनत तो मैंने भी की थी तो क्यों उन्हें ही सब मिला
वो तो खुश हैं ज़िन्दगी में पर हमारा चल रहा है अभी भी ये सिलसिला
इतना तो समझ आ गया कि
ये सिर्फ मेहनत नहीं किस्मत का खेल है
कामयाब वही होता है जिसके पास इन दोनों का मेल है।
बस किस्मत ने साथ नहीं दिया
वरना इंसान हम भी बेकार नहीं
मेहनत तो उन कामयाबों से भी बढ़कर की है
बस सपने ही हुए साकार नहीं
इस तरह हमारी नाकामयाबी के ताने मारकर
हमें पल–पल मत मारिए
हमारी की हुई मेहनत पर सवाल उठाकर
उसे यूं ना नकारिए।
कामयाबों को आपकी तारीफें मिलती हैं
हमें इससे नहीं कोई ऐतराज़ है
कुछ तो अच्छा जीवन में हम हासिल कर ही लेंगे
क्योंकि हमें अपनी मेहनत पर पूरा नाज़ है।
(ये कुछ लाइंस उनके लिए जिन्होंने मेहनत तो जी तोड़ की थी लेकिन किस्मत के साथ ना होने पर वो उस मुकाम को हासिल ना कर पाए। जो सफल हैं उन्हें तो हर कोई शाबाशी देता है लेकिन जो ये हासिल नहीं कर पाए सिर्फ और सिर्फ किस्मत की वजह से, उन्हें तो इस तरह मत दुत्कारिये।)
—हेमंत शर्मा "हर्षुल"