"आत्मकथा कब से सच्ची लिखी जाने लगी है?
उसके अलफ़ाज़ बनावट की दीवारों से सराबोर होतें हैं.न्यायोचित प्रसंग,'लेखक का फायदा-नुकसान तय करवाता है'..अत: वह,वही लिखता है,जिससे सहानुभूति प्राप्त हो,एवं दिमागी उपज के द्वारा वर्षों तक प्रसिद्ध हो सके."
---डॉ अनमिका----