जौहर की दस्तक....
मान का अपमान है
नारी के सम्मान में फिर चला प्रहार है
भारत के भूमि पर अब बचा ना कोई स्वाभिमान है
इज्जत है ना आबरू सिर्फ भोग विलास है
ना बची इंसानियत फिर दिखी जौहर की राह है
अब नर नहीं या नारी नहीं फिर संघार ही संहार है
माता का स्तन अब दूध के नहीं रही जन्म का द्वार अब बना गुस्से की समान है
पुरुष अब कायर बना इज्जत का कोई रखवाला नहीं
निर्वस्त्र कर घूमा रहा मर्यादा बची ना मानवता
मूक बधिरों की समाज में ना कानून हैं ना सज़ा बनी
उठो हर नारी दुर्गा बनो , हाथों में
ममता की नहीं संहार के लिए थाम लो तलवार तुम ना जन्म दो ना जीवन दो सिर्फ मृत्यु का आगाज करो
मचा दो विध्वंस हर तरफ नर की लाश ही लाश हो
भारत के भूमि पर नया शक्ति का आगाज हो ....
स्वरचित कविता - लेखक "मोनी"