"शून्य"
हां, ऐसे तो मैं शून्य कहलाता हूँ,
हां, अकेला हूं तो ही मैं शून्य हूँ।
एक के पास रख दिया करो,
एक के साथ मिलकर दस हूँ।
जैसे जैसे शून्य बढ़ाते जाओगे,
दस गुना मैं बढता रहता हूँ।
मेरै बिना सबकुछ अधुरा है
मुझे गर्व है कि मैं शून्य हूँ।
इस बात की बहोत खुशी है मुझे
हां मैं तो भारत की ही खोज हूँ
अब तो आप ही बताओ जरा,
क्या अभी भी मैं शून्य ही हूँ।
बिंदिया जानी 'तेजबिंदु'
८/१० /२३