कुछ ख्वाब छिपा रखे है इन आंखो में
जो मैंने कभी तेरे साथ देखे ही नही।
कुछ गीत लिखे है तेरे नाम
जो मैंने तुझे कभी सुनाए ही नही।।
कुछ कागजो पर उकेर रखा है तेरा चेहरा
जो आज तक तुझे दिखाया ही नही।
कुछ लम्हें सिमटे है मेरी बांहो में
जो आज तक तेरे संग बिताए ही नही।।
कुछ खत छिपा रखे है डायरी में मैंने
जो आज तक मैंने तुझे दिखाए ही नही।
तेरी एक तस्वीर रखी है मन के कैदखाने में
जो मैने कभी बनवाई ही नही।।
कुछ ख्वाब छिपा रखे है इन आंखो में
जो मैंने कभी तेरे साथ देखे ही नही।।
मीरा सिंह