लड़की तो मां बन जाती ही हे , कोई नई बात नहीं।
लड़के को एहसास होते हुए भी बाप बनना कठिन है।।
जोब पहली शर्त होती है शादी की , आदमियत नहीं ।
खुद का हुनर कुर्बान करके घर चलाना कठिन है।।
जिससे कभी मिले ना उसको खुद से अच्छा मानना।
जाने बिना ही उसको दिल में रखना जरा कठिन है।।
मां का सपना , बाप की ज़िद और बहन की ख्वाहिश।
तीनों को साकार करके किसीका हो जाना कठिन है।।
आंसू सस्ता सौदा नहीं जिम्मेदार कभी रोता नहीं ।
दिल और दिमाग को लोहा बनाना कठिन है।।
हर पल खुद या समाज से लड़ना सिखा उम्र भर ।
उसी से प्यार के गीत सुन पाना जरा कठिन हे।।
लड़के भी कुछ चाहते है, कुछ मांगते हे , किसे कहे ।
जिम्मेदारि सिर्फ सुनती हे, उसका बोलना कठिन है।।
समंदर बहुत बड़ा हे, आंखें और आसमां बडा चाहिए ।
खुद की सीमा में गहरी नदी समाना जरा कठिन है।।
जरा सा हिलाओ वो बिखर के चूर चूर हो सकता हे।
लेकिन उसे उसकी ही याद दिलाना जरा कठिन है।।
हर छोटी बड़ी जंग में कैसे भी करके जीतता जाए जो ।
देर रात उसकी प्यारी लोरी सुन लेना जरा कठिन है।।
मानते और जानते भी हो के बाहर पिशाच बैठे हे।
उसी से बचकर शाम को दो रोटी कमाना कठिन है।।
जो हर वक्त , हर पल, हर गुनाह से वाकिफ रहता हो ।
उसी में वफा और प्यार को झांक लेना जरा कठिन हे ।।
कोई आ जाता है अपना संसार छोड़के, चलो माना ।
लेकिन अपने ही संसार में उसे घोल लेना कठिन हे ।।
क्युकी छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं, अपनाना बड़ा हे।
खुदको जिंदा रखकर किसीको जिंदगी बनाना कठिन हे।