हिंदी है इस देश का गौरव
एक डोर में बांधती सबको, वह हमारी हिंदी है।
हर भाषा को सगी बहन, मानती जो हिंदी है।।
भरी-पूरी हों सभी बोलियां यही कामना हिंदी की।
गहरी हो पहचान आपसी यही साधना हिंदी की।।
नए अर्थ के रूप धरती हर प्रदेश की माटी पर।
‘खाली-पीली बोम मारती’ देश की चौपाटी पर।।
हिंदी चरित्र है भारत का, नैतिकता की परिभाषा।
हिंदी हम सब की ख़ुशहाली, विकास की रेखा।।
हिंदी में इस धरती ने हर ख़्वाब सुनहरा है देखा।
हिंदी है इस देश का गौरव भविष्य की आशा ।।
सौत विदेशी रहे न रानी यही भावना हिंदी की।
तत्सम, तद्भव, देश, विदेशी अपनाती सब रंगों की।।
जैसे आप बोलना चाहें वही मधुर, वह मन भाती।
हिंदी हर दिल की धड़कन है, भाषा जनता को आती।।
चौरंगी से चली नवेली प्रीती-पियासी हिंदी की।
बहुत बहुत तुम हमको लगती ‘भालो-बाशी’ हिंदी की।।
इसको कबीर ने अपनाया मीराबाई ने मान दिया।
आज़ादी के दीवानों ने हिंदी को सम्मान दिया।।
उच्च वर्ग की प्रिय अंग्रेजी हिंदी जन की बोली है,
वर्ग भेद को ख़त्म करोगे हिंदी वह हमजोली है,
सागर में मिलती धाराएं हिंदी सबकी संगम है,
शब्द, नाद, लिपि से भी आगे एक भरोसा अनुपम है,
गंगा-कावेरी की धारा साथ मिलाती हिंदी है।
पूरब-पश्चिम,कमल-पंखुड़ी सेतु बनाती हिंदी है।।
हिन्दी का जयकारा, हिन्दी हिन्दी में बोला।
देख स्वभाषा-प्रेम का, विश्व अचरज से डोला।।
हाय,भूपेंद्र कविराय से, प्रेम की माया टूटी।
भारत माता धन्य जिसमें स्नेह की सरिता फूटी।।
भूपेंद्र प्रभाकर