फल सब्र का ज़रूर निकलेगा घर से निकला है दूर, तो बड़ी दूर
निकलेगा
ढूँढ कहीं ना कहीं कोई कमी तो रही होगी तू ग़र हारा है, तेरा क़सूर
ज़रूर निकलेगा
जिंदगी का यही दस्तूर है समझलो कुछ हाथों से दुआएँ, कुछ हाथों
से खंजर ज़रूर निकलेगा
कश्ती कभी डगमगाए भी तो घबराना ना तू अगर डूबा भी, यक़ीनन कही दूर निकलेगा ..!
@AAKASH BHARATI