पैसा बिन बाप काहे बेटा ही कपूत भयो,
और पैसा बिन भाई कहे बंधु दुख दाई है।
पैसा बिन नारी कहे निखट्टू के पाले पड़ी,
पैसा बिन सास कहे काहे को जमाई है जमाई है।
पैसा बिन यार बस पैसा बिन भगिनी पास,
पैसा बिन देव नहीं करते सहाई हैं।
कहते गरीब दास पैसा तुम रखो पास,
ओ पैसा बिन मुर्दे ने लकड़ी नहीं पाई है।।