में ज़िंदगी के उस पड़ाव से भी गुजर चुका हूं,
जहां लोग ज़िंदगी से हारकर गलत कदम उठा लेते हैं,
आप सोचते हो की गलत कदम उठाने से सब ठीक हो जायेगा,
बल्की जैसा आप सोचते हो ऐसा कुछ नहीं होता हैं ,
पर मेने ऐसा नहीं किया मैंने उन हालातो का हसकर सामना किया हैं,
परीस्थियो के सामने डटकर खड़ा रहा हूं मैं,
क्यों की ज़िंदगी एक बार मिलती हैं तो उसे ऐसे ही ना गवा दे....!!!
शायर " हर्ष "