यार तुम मुझे बहुत डिस्टर्ब करते हो और कुछ करने नहीं देते|
हर समय याद आते हो और कुछ याद करने ही नहीं देते||
इतिहास में कांग्रेस अधिवेशन भी लखनऊ में ही करती है|
भूगोल में भारतीय समय मानक रेखा भी लखनऊ के पास मिर्ज़ापुर से गुज़रती है||
सिपाही विद्रोह या १८५७ की क्रांति पढता हूँ तो बेग़म हज़रत महल आ जाती है|
फिर ,तुम्हारे बड़े, सुप्रिशिद्ध नबाबी और कबावी शहर को याद दिला जाती है||
शहर से तुम्हारा याद आना,अच्छा शहर नहीं अच्छे तुम हो विस्मित सा मैं , शहर तुमसे या शहर से तुम हो 😍
हमें भी बदलकर 'मैं ' से बना चुकी 'हम ' हो ||
भगवान को इतना याद करते तो हो गए होते सन्यासी |😂
पाठ्यक्रम को याद करते तो शायद हो गए होते उपन्यासी ||
तुम मेरे ह्रदय सागर में बह रहा निर्मल सा क्षीर हो|
जैसे गोमुख से यकायक निकली गंगा का पावन नीर हो||
मैं जैसे कानपुर में गंगा में प्रवाहित कचरे सा हूँ.|
या फिर घिसे हुए बहुत पुराने अचरे सा हूँ.||
साथ तो बहाओ,आगे मर्ज़ी तुम्हारी डेल्टा बनाओ या जलोड मिट्टी|
तुम्हारे बात करने भर से ही हमारी तो गुल हो जाती है सिट्टी पिट्टी||
😊🤭😏😜🥰💛