एक शेर था, जंगल का राजा।घने जंगल में उसे किसी का डर नहीं था।लम्बी-लम्बी छलांग लगा सबको चकित कर देता था।ये छलांगें कभी यात्रा के लिये होतीं , कभी मौजमस्ती के लिए और कभी शिकार के लिए।कुछ मनुष्य जैसे गुण उसमें थे।फिर एक दिन उसे पकड़कर पिजड़े में बंद कर दिया गया।अब उसका जीवन पिजड़े में सिमट गया।उसी में इधर-उधर, निराश घूमता या सोया रहता।खाना वक्त पर मिल जाता। लेकिन सरपट दौड़ का आनन्द गायब था।जीवन जैसे ठहर गया था।