पीड़ित हूँ
मन भारी,अशांत हैं
विक्षिप्त महसूस हो रहा हैं
दर्द आँखों में उतर आया हो
तब मेरा सहारा कागज़ बनता हैं
उसमें सारी चीज़े लिख देता हूँ
कागज़ ही मेरी अवस्था समझता हैं
में उनके साथ अपना दर्द बाँट लेता हूँ
क्यूंकि मुझे लिखना आता हैं
मुझे किसीके कंधे
की कभी जरूरत नहीं पड़ी
निक राजपूत -