प्रेम
मेरा प्रेम तुम्हारें प्रति
केवल आकर्षण ही नहीं
तुम्हारे प्रेम में
ईश्वर को देखता हूँ
तुम स्वयं परमात्मा हों
तुम्हारा प्रेम मेरे लिए
उपहार हैं
तुम्हारा प्रेम जैसे उत्सव
जिसका जश्न कभी
ख़त्म ही न हों
तुम्हें देखते ही पूजने के भाव
हृदय में जन्म लेते हैं...
निक राजपूत