सूक्ति - “ चिता चिंता समाप्रोक्ता बिंदुमात्रं विशेषता। सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता॥14॥ “
अर्थात - चिंता चिता समान है . चिता तो मरे हुए व्यक्ति को केवल एक बार ही जलाती है परन्तु चिंता जीवित मनुष्य को जलाती रहती है .
The funeral pyre burns the dead body only once . But worries keep him burning throughout life.