पहाड़ ऐसे ही होते हैं
ऊँची कहानियां कहते
प्यार से लबालब भरे,
बादलों घिरे
नदियों को जनमाने वाले
आसमान से जुड़े
दिलों में बैठे
घुमावदार रास्तों वाले
झीलों के रचनाकार।
पहाड़ की गरदन पर
लिखी रहती हैं
कठिन घुमावदार बातें ,
लोगों की कहानियां
गीतों की अनसुनी धुनें।
पहाड़ बोलते हैं
मेरे लिए,तुम्हारे लिए
हम सब के लिए ,
सावधान करते हैं
अनुचित बातों से ,
हमारे कदमों को
ऊँचाई पर ले जा
एक दूरदर्शिता दर्शाते हैं।
पहाड़ बोलते हैं
मेरे लिए,तुम्हारे लिए
हम सब के लिए।
** महेश रौतेला
१८.०५.२०१५