नजरों में विधवा हुई है।'विधवा' शब्द सोचकर एक विद्रूप मुस्कराहट उसके होठो पर फैल गयी।लोगों के जाते ही वह अपने कमरे में जाकर लेट गई एवं विगत की स्मृतियां चलचित्र की भांति उसके मस्तिष्क पटल पर गतिमान हो गईं।
उस जमाने में लड़कोंं को तो फिर भी थोड़े अधिकार प्राप्त थे अपनी पसंद नापसंद व्यक्त करने का, किन्तु लड़कियों को तो एक-दो दिन पहले पूर्व बस सुुचना दे दी जाती थी कि फलां दिन-समय लड़के वालेे आ रहे हैं तैयार हो जाना।देखने-दिखाने की प्रक्रिया पूर्ण हो जानेे के पश्चात यदि 10-15दिनों में जबाब आ जाता था तो ठीक, नहीं तो वर पक्ष से परिणाम पूूूछ लिया जाता था।लड़की को कुछ कहने-सुनने का अधिकार कदापि नहीं था, समस्त निर्णय पिता, चाचा, ताऊ,फूफा,दादा या बड़े