फरियाद
विस्पी, आज करती हूं दिल की बात, ऐसे तो मैं दुनिया बहुत घूमी हूं, आपके साथ;
पर आपके जाने के बाद, दुनिया को सही मायनों में समझने लगी हूं; जब बदल गए है हालात।
क्या यह हकीकत है, क्या यह सच है, या है कोई डरावना सपना!
कैसे बदल गए यह बच्चे, जिन्हे समझा था तुमने और मैने, सच्चे दिलसे अपना
शायद आज बड़े होने पर, भूल गए वो, बचपन की सारी सुनहरी यादें;
भूल गए वो, प्यार के मजबूत बंधन; लगता है, बदल गए है आज उनके इरादे;
वो गोदी में खेलना, वो अनगिनत कहानियां, गीत, खेल और किए हुए सारे वादे !
भले जन्म न दिया हो उनको, पर थे और अब भी है, दिल के करीब ।
पर आज बदल गया है जमाना, अब रिश्ते बन गए हैं बोझ; उन्हें शायद लगने लगी हूं मै गरीब !
अच्छा है, औरों की तरह, मेरी शेरिन बदली नही; अब भी उसे बचपन में दिया हुआ प्यार है याद;
बच्चों, इतना मत बदल जाओ, इतना न दूर हो जाओ, जरा सुनो मेरी भी फरियाद।
Armin Dutia Motashaw