आइने में.....
आयने में खुद को देखा तो यकीन आया,
घर में मुझे किसी ने पहचान तो लिया।
वरना अपना कहने वालों की दुनियां में,
हम जैसे गैरों की शिनाख्त ही क्या?
हक था तुम्हें सो तुमने प्यार के एहसास बेच दिए,
थोड़ी सी तसल्लियां लेकर हमारा करार खो दिया।
रात और दिन दिए जलाये प्यार के फिर भी चाँद न दिखा,
किस्मत में जो अंधकार था तुमने वही खुशी से भर दिया।
हमनें कभी कुछ पूछा ही नहीं और ज़िन्दगी सवालों से भर गई,
कितनों का जबाब ढूंढती, तुम मुड़े और रास्ता बदल दिया।
समाप्त।