हम जिसके कैदी है
वो कब आजाद करेगी
उसके ख्वाबों से आजादी
का कोई मंजर नजर नहीं आता
जितना छूटना चाहता हूं
उसके मदमस्त कैद
उतना ही और कैद होता जाता हूं
अब तो उससे ही उम्मीद है
कम से कम ख्वाबों में आ कर
इस कैद से कुछ पल
के लिए मोहलत दे
बस योंही कभी कभी
यह ख्याल आता है