इक रात सोची थी तेरे साथ बिताऊँ
तेरे बाजुओं में सिमट कर सो जाऊँ
हर ख़्वाहिश हो गई पूरी हमारी
ये तमन्ना मुकम्मल में कर ना पाऊँ
वो बनाया था धर जो ख़्वाबों का हमने
मे खोलू जो खिड़की तुझे सामने पाऊँ
वो किताब भरी है उम्मीदो की मेने
हो फ़ुरसत तो सुनो तुम में लिखती जाऊँ
सौ टुकड़ों में तुटा था ये दिल हमारा
दिल तोडने वालों को में क्या बताऊँ
उतारा है सीने में आँखों से तुमको
मेरे हो तुम ये में किसकीसको सुनाऊ