मानव तेरा अस्तित्व रहेगा
ऐसे ही तो मित्र बनेंगे
श्रीकृष्ण जैसे सखा दिखेंगे,
जल हाथों में पवित्र रहेगा
शिव में अपना ध्यान रहेगा।
युग की सम्पूर्ण विद्या होगी
मानव तेरा अस्तित्व रहेगा,
विजय-पराजय में उलझा तू
महामानव सा दिखा करेगा।
पथ भी तेरा लिखा रहेगा
स्वयं ऊर्जा में बहा करेगा,
प्रकाश पुंज जो तुझमें है
बार-बार भू पर दिखा करेगा।
खोजखाज कर तू प्रकृति को
घर घर तू पहुँचायेगा,
दूरदृष्टि का रखवाला बन
स्वच्छ संस्कृति बनायेगा।
पहर तेरे चारों होंगे
सबका मोल चुकायेगा,
सुबह- शाम तक अपनी क्रिया
विविध रूप में दिखलायेगा।
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* महेश रौतेला