सूरज हो अगर दिन में शमा फ़िर याद नहीं आता
ज़रा से दिन के ढलते ही ये रात को काम नहीं आता
बिन मतलब के कोई याद करे ऐसा हो नहीं सकता
रात दिए की बात करते हो फ़िर दिन को साथ नहीं आता ।
जो दिन को याद नहीं आया बुझाया रात नहीं जाता
तारीफें जम के बरसीं की बताया बात नहीं जाता
मगर इस बात को मेरी ज़रा तुम याद कर लेना
बिना माचिस की तीली के जलाया चिराग़ नहीं जाता ।
-श्रुति शर्मा❤