सभी को विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
हिन्दी दिन- ब- दिन बढ़ रही
चिंता की कोई बात नहीं
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कोटि कोटि जनों की भाषा
कोटि कोटि दिलों की भाषा
हिन्दी को हक़ देना होगा
कहना और लिखना होगा
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किसी गैर देशीय भाषा में
खुल पाते हैं ज़ज्बात नहीं
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तुलसी से लेकर कबीरा तक
ख़ुसरो , मीरा , निराला तक
हिन्दी लोक हृदय में रही है
मानस से मधुशाला तक
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हिन्दी मुस्लिम सिख ईसाई
हिन्दी की कोई जात नहीं
हिन्दी दिन- ब- दिन बढ़ रही
चिंता की कोई बात नहीं
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उर्दू, बंगाली, गुजराती
कहो क्या समावेश नहीं ?
हिन्दी तो गंगा जैसी है
किसी से द्वेष -क्लेश नहीं
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महफ़िल , रैली सबमें यह
बिन इसके बारात नहीं
हिन्दी दिन- ब- दिन बढ़ रही
चिंता की कोई बात नहीं
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इस पुण्य-धरा की गर्भनाल से
जुड़ी है हिन्दी बेटी सी
संस्कारों की बगिया है यह
महक इसमें संस्कृति की
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हिन्दी सेवा ही राष्ट्र -वंदना
इससे उँची सौगात नहीं
हिन्दी दिन- ब- दिन बढ़ रही
चिंता की कोई बात नहीं
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रचनाकार :- गौतम कुमार सागर ( वडोदरा )