#मन की बात
"कभी कभी हम सोचते है, लोगों ने मोबाइल को बदनाम किया है या मोबाइल ने लोगो को?"
लोग मोबाइल के dp, status, और intragram के पोस्ट की वजह से जज कर लेते है। "ये तो ऐसा होगा" इसबात का बहोत बुरा लगता है। एक मशीन जिसे हमारे जीवन के कुछ कार्य को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। आज उस मशीन से लोग "हम कैसे है?" ये certificate दे रहे है।
मे किसी और की बात नहीं करुगी। अपनी बात से शुरुवात करती हु।
हम लेबोरेटरी मे as a assistant की पोस्ट पर जॉब करते थे। जहा पर मेरा काम मरीज का ब्लड सेम्पल लेना था। और कभी कभी मशीन पर रिपोर्ट भी निकाल देते।
एक दिन हमें कोई काम नहीं था। इसलिए मोबाइल पर कहानी पढ़ रहे थे। तभी वहा एक मरीज आया, आते ही उंची आवाज मे मुझे सेम्पल लेने को बोला और फिर ये भी बोला की "मोबाइल बादमे चलाना" मेने बिना कुछ बोले सेम्पल लिया और उस मरीज को बैठने को बोल दिया। तब मन मे ख्याल आया, मोबाइल के लिए लोगों की सोच कैसी है?
दूसरी बात..... वही कहानी फिर हुई, उस दिन मोबाइल की जगह मेरे हाथ मे बुक थी। हम बुक पढ़ रहे थे, मरीज आये, मुझे बुक पढ़ते देखकर, बड़े आराम से बात की, डॉक्टर की चिठ्ठी दी और सेम्पल लेने को बोला। इन दोनो घटना ने एक बात तो समझा दी। लोगों का देखने का नजरिया बहोत गलत है।
अगर बाजार मे कोई लड़की फोन पर बात करके मुस्कुरा रही हो, तब आपके मन मे पहला ख्याल क्या आयेगा? हम नहीं बतायेगे आप खुद ही सोच लो।
सिर्फ लड़कियों की बात नहीं है। लड़को के साथ भी ऐसा होता है। कोई लड़का पुरा दीन मोबाइल लेके बैठा हो तो? परिवार, पड़ोसी सब सही गलत बाते सुनायेगे। बोलेंगे की "पुरा दिन मोबाइल मे पड़ा रहता है पता नहीं क्या करता होगा।" अब पुरा दिन मोबाइल लेके बैठा है तो, ये भी हो सकता है, वो मोबाइल मे कोई काम कर रहा हो।
जरूरी नहीं है की सारे लोग मोबाइल मे फालतू काम करते हो। मोबाइल मे बहोत कुछ आता है जो हमारे करियर को बनाने मे मददरूप होता है।
अगर आम के बॉक्स मे एक आम खराब होता है तो क्या आप बाकी बचे आम को भी खराब कह देगे, उसी तरह कुछ लोगों की वजह से आप सारे लोगों को गलत नहीं कह सकते हो।
अपने अपने नजरिये की बात है। कोई पॉजिटिव सोचेगा तो कोई नेगेटिव सोचेगा। नेगेटिव सोच रखने वाले ज्यादा होंगे।
काश सब ये बात समझ सके की सारे लोग एक जैसे नहीं होते है।
"एक बार अपना नजरिया बदलके देखो, सोच अपने आप बदल जायेगी।"
_Miss Chhotti