स्वीकार
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ढल रहा है बीते साल का सूरज
नववर्ष आ रहा हौले से सज-धज
बीते पल छोड़ रहे अपनी निशानी
आने वाला पल ले रहा चरणो की रज।
सुखद हो हर आने वाला नव पल
खिलखिला कर जी उठे जिंदगी कल
स्वीकार है सब को नववर्ष का आगमन
फूले -फले सभी उत्साह की हो हलचल।
होता रहता है अक्सर सुख -दुखों का संगम
निराशा में भी छोड़े ना आशा भरे कदम
कामयाबी का रास्ता है मेहनत और तकदीर
कर्म में ही छुपा हुआ है जिंदगी का उद्गम ।
आभा दवे
मुंबई