अक्सर लोग
पूछ लेते हैं..
तेरे-मेरे इश्क़ का किस्सा..
ख़ामोश आँखे
बोल देती..
तेरे-मेरे वफ़ा का हिस्सा...
धड़कनें जुदा होती नहीं..
मिले कोई शाम
कभी ऐसा हुआ नहीं..
फिर भी एक डोर बंधी
है तुमसें..
मैं तेरे ज़िंदगी का किस्सा
और सच भी यही
तू मेरे साँसों का हिस्सा...!!
#मेरी रुह@