तुमने कहा था कि,
मैं तुम्हारी चांदनी हूँ , जीवन भर साथ तुम्हारे रहूंगी,
पर चाँद दिखा एक पल को और धूप चली कोसों तक।
तुमने कहा था कि,
मैं दरिया की तरह बहती रहूंगी तुम्हारे साथ साथ,
पर तुम ठहर गईं एक ही जगह झील की तरह और मैं बहता चला गया कोसों तक।
तुमने कहा था कि,
मैं तुम्हारी तस्वीर को रखूंगी अपने दिल से लगाकर,
पर तुम कहकर कहां गुम हो गई, कुछ पता नहीं और
मेरी तस्वीर के फ़टे टुकड़े उड़ते रहे हवा में कोसों तक।
तुमने कहा था कि,
मैं गीतों में सुनाऊँगी तुम्हें अपने प्यार की लोरियां,
पर लोरियां तो सुनीं नहीं, शिकायतें अपनी ही सुनता रहा कोसों तक।
तुमने कहा था कि,
तुम सिर्फ एक कागज हो, बस लिखना ही जानते हो और कुछ भी नहीं,
भले ही में एक गीला कागज़, जो जलाने का न लिखने का,
फिर भी तुम्हारी चाहत में स्याही फैलाता रहा कोसों तक।
- शरोवन.
- समाप्त।