वो दिन भी क्या दिन थे...
जब छोटी सी बात पर रूठ जाया करते थे.......
जब सब को हमारे रूठने से फर्क पड़ता था......
जब दो मिनट चुप बैठने से पूछने वाले पास आ जाते थे .......
पर अब इस बाघम बाग की जिंदगी में हा , हूं , ओके बनकर रह गए हैं ........
सच में वो दिन भी क्या दिन थे जिसकी यादों से हम आज भी निकल नही पा रहे हैं..........