पेड़ों की तरह उगते हैं हम,
घने भी होते जाते हैं,
धीरे-धीरे छायादार बनते हैं।
कालान्तर में आकाश की तरफ बढ़ते,
बहुत ऊँचे हो जाते हैं।
जड़ों से मजबूत हों तो,
किसी तूफान में टूटते नहीं,
हमारी शाखाएं लम्बी-चौड़ी हो
कभी काटी जाती हैं,
कभी सूख कर गिर जाती हैं
कभी कल्पवृक्ष बनी रहती हैं।
*** महेश रौतेला
०१.११.२०१८