वेद वाणी 8-93-1
उद्घेद॒भि श्रु॒ताम॑घं वृष॒भं नर्या॑पसम् ।
अस्ता॑रमेषि सूर्य ।
॥ऋग्वेद ८-९३-१॥
जगद् विख्यात, ऐश्वर्य-सम्पत्र, शक्तिशाली, मानवमात्र के हितैषी, लोक हितकारी और पृथ्वी से दुष्ट अशुद्धियों को नष्ट करने वाले आदित्य वर्ण, हे तेजस्वी सूर्य, आप उदय होकर हमें प्राप्त होवें ।
The world famous, opulent, powerful, benevolent to mankind, beneficial to the people and the Aditya Varna who destroys the wicked impurities from the earth, may you rise and attain us, O splendid sun.
।। ऋग्वेद ८-९३-१ ।।